प्रागैतिहासिक काल की चित्रकला
छापा चित्रों का प्रारंभ- छापाअंकन पद्धति की खोज- मिर्जापुर
पाषाण युग के औजारों खोज-ब्रुसफुट ने (मद्रास के समीप पल्लवरम नामक स्थान पर)
पुस्तक -प्रि हिस्टोरिक पेंटिंग - बाडरिक1958
प्रि हिस्टोरिक इंडिया-स्टुअर्ट पिगाट1950
भारतीय प्रागैतिहासिक चित्रकला का इतिहास -डॉक्टर जगदीश गुप्त
👉 चित्र-आखेट के
👉 रंग -गेरुआ
👉 3 भागो में बाटा गया है-
पूर्व पाषाण- इसमें मनुष्य को क्वार्टीजइट नाम से बुलाया जाता था ।
👉 आदिमानव का प्रमुख केंद्र- बेल्लारी
👉 पहला औजार-कुल्हाड़ी
👉 मनुष्य लकड़ी ,हड्डी पत्थर के मोटे भद्दे औजार बनाता था
👉 गुफाओ में रहता था
👉 क्वार्टीजइट यंत्र मद्रास ,गुंटुर जिले के अंगोला ओर कुड़ापा नामक जगह से मिले।
मध्य पाषाण काल
👉 इस काल मे औजारों को ज्यामितीय व सुडौल रूप दिया गया।
👉 मिट्टी के बर्तन बनाने का प्रयास किया ।
उत्तर पाषाण /नव पाषाण काल
👉 चित्रकला का विकास हुआ
👉 कृषि का विकास
👉 पशुपालन का विकास
👉 पत्थर का गड़ा हुआ एक गोल यंत्र मिला नर्मदा नदी की घाटी से
👉 चाक पर बने मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग
प्रागैतिहासिक स्थल
उत्तर प्रदेश
👉 मिर्जापुर में विंध्याचल पर्वत की कैमूर श्रंखला के अंदर सोन नदी घाटी में एक सौ से अधिक गुफाएं ओर शिलाश्रय प्राप्त हुए ।
👉 प्रमुख स्थल- कोहबर,भल्डरिया,लखुनिया,कंडाकोड, कोहबर,मढ़हरिया,विजयगढ़,धोड़मंगर, सोरहोघट, हरनी हरण, खोड़हवा।
सोरहोघट
👉 सुअर का आखेट (गेरू रंग में,पीड़ा की अभिव्यक्ति)
👉 साही के आखेट
👉 हाथ के छापे, मानवाकृति ओर पशुचित्र अंकित है।
लखुनिया
👉 गरई नदी के किनारे
👉 हाथी का शिकार,पशु आखेट
👉 घुड़सवार हथिनी की मदद से हाथी को पकड़ते
👉 नृत्यवादन में मस्त व्यक्तियो का समूह
👉 बारहसिंघे का आखेट
करियाकुंड
👉 बारहसिंघा का पीछा करते धनुधारी
बिढम
👉 खोज-जगदीश गुप्ता
👉 पहियेदार गाड़ी का चित्र
धोड़मंगर
👉 गेंडे के शिकार का दृश्य, गेरुए रंग में अंकित
भल्डरिया
👉 चित्रो की खोज काकबर्न ने 1883 में की।
👉 घायल सुअर
मढ़हरिया
👉 ऊंट का चित्र
👉 हरनी हरण से गेंडे के शिकारियों के चित्र
मलवा
👉 बिना पहिये की गाड़ी जिसमे एक आदमी बैठा हुआ।
👉 तीन दण्डधारी अस्वारोही आपने घोड़े के साथ एक दिशा में चल रहे ।
👉 भूत का रहस्यमयी चित्र डोकवा महारानी कंडाकोट से मिला है।
मध्य प्रदेश
पंचमढ़ी क्षेत्र-(9-10 सदी)महादेव पर्वत श्रृंखला
👉 खोज-डी एच् गार्डन
👉 पंचमढ़ी छेत्र- इमली खोह, महादेव ,बनिया बेरी, बाजार केप,भाड़ा देव,निम्बूभोज,लस्कररिया खोह ,सोनभद्रा
👉 इमली खोह से सांभर के आखेट का दृश्य
👉 भाड़ादेव गुफा की छत पर शेर के आखेट का दृश्य महादेव बाजार में विशालकाय बकरी का चित्र
आदमगढ़
👉 हाथी पर चढ़े आखेटकों को जंगली भैंसे का आखेट करते दिखया है
👉 छलांग लगाते बारहसिंघा का चित्र(गहरी पृष्ठभूमि पर पीली रेखाओ से चित्र)
सिंघनपुर
👉 खोज-1910 में एंडरसन ने
👉 1913 में अमरनाथ ने
👉 1917 में पर्सी ब्राउन ने चित्रों का परिचय दिया
👉 मांड नदी के पूर्वी किनारे के पूर्वी और स्थित
👉 50 से अधिक शिलाश्रय
👉 द्वार पर असंख्य कंगारू के चित्र चित्रित है
👉 घायल भैंस ,खरगोश,सूंढ उठाये हाथी , हिरण आदि के चित्र
भीमबेटका
👉 खोज-उज्जैन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वाकणकर ने भीमबेटका नामक पहाड़ी पर
👉 600 गुफाएं लगभग 275 गुफाओं से चित्रों के अवशेष प्रप्त हुए
👉 सर्वाधिक लाल रंग प्रयोग में लिया गया है
👉 शिकार नृत्य, हिरण, सूअर ,आखेटक आदि का चित्रण
मंदसौर
👉 मंदसौर जिले में 'मोरी' नामक स्थान पर 30 पहाड़ी खोह मिली है
👉 जिनमें स्वास्तिक, चक्र ,सूर्य ,कमल, पीपल की पत्तियों के प्रतीकात्मक चित्र हैं
👉 देहाती बांस से बनी गाड़िया यहा चित्रित हैं
👉 नृत्यरत मानव,पशुओं को हाँकते ग्वाले
होशगाबाद
👉 जिराफ समूह ,चार धनुर्धारी, घोड़े,हाथी सवार आदि अंकित है
👉 छेपाकंन (stencil) पद्धति में।
बिहार
👉 चक्रधरपुर,सिंघनपुरऔर शाहाबाद से चित्र मिले हैं
👉 लेटी और शिकार करती मानव आकृतियों को दर्शाया है
दक्षिण भारत
👉 बेल्लारी,रायचूर और वसनगुडी(बैंगलोर)से चित्र मील है। रायचूर की ऋषिमूक पर्वत माला में श्री एवं श्रीमती अल्चीन ने खोज की
👉 दक्षिण भारत का सबसे प्रमुख प्रागेतिहासिक केंद्र बेल्लारी
👉 बेल्लारी -1892 एफ फासेट ने चित्र
राजस्थान
👉 अलनिया नदी घाटी पर से चित्र प्राप्त हुए हैं
👉 इन्हें सीता जी के मांडने भी कहते हैं
👉 गेरू रंग से चित्रित
👉 जंगली सांड,हिरण,भालू,बकरी,गाय ओर मानवाकृतियों आदि के चित्र मिले है।
👉 झालावाड़, दरा,भरतपुर और गागरोन से चित्र मिले हैं